नाग पंचमी पर्व का महत्व क्या है? क्यों मनाया जाता है?

नाग पंचमी पर्व का महत्व क्या है? क्यों मनाया जाता है?
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नाग पंचमी पर्व क्यों मनाया जाता है?

नाग पंचमी उत्सव मनाने का कई ऐतिहासिक एवं पौराणिक मान्यताएं हैं नाग पंचमी का त्यौहार महादेव को अत्यधिक प्रसन्न करने वाला पर्व है। भविष्य पुराण में एक वर्णन मिलता है जिसमें स्पष्ट रूप से इस श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष को नाग देवता को समर्पित किया गया है। यही कारण है कि इसे नाग पंचमी कहा जाता है।

एक मान्यता के अनुसार ब्रह्मा जी ने जब सृष्टि का निर्माण किया उस समय पृथ्वी के भार को संभालने के लिए शेषनाग का चयन किया और उन्हें अलंकृत किया। शेषनाग के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए लोगों ने नाग देवता की पूजा करनी शुरू कर लिया और यह प्रथा आज भी निरंतर चली आ रही है। ऐसी भी मान्यता है कि जो सिर्फ होते हैं वह हमारे पूर्वज होते हैं और अगले जन्म में सर्प के रूप में भी अवतरित होते हैं

यही कारण है कि अनेक स्थानों पर नाग देवताओं की पूजा बड़े ही धूमधाम से की जाती है। एक और कथा के अनुसार द्वापरयुग में श्री कर्षण भगवान ने इसी दिन कालिया नाग से वृंदावन के लोगों की प्राणों की रक्षा की थी।

प्रसिद्ध गरुड़ पुराण में भी नागपंचमी से संबंधित बातें कही गई हैं। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि नाग पंचमी के दिन सभी घरों को एवं द्वार को गोबर गंगाजल से लिप आ जाना चाहिए। द्वारों पर गोबर से सर्प के प्रतीकात्मक चित्र बनाना एवं मिट्टी या आटे के सांप को बनाकर उन्हें रंगो में रंगना। फिर षोडशोपचार के विधि द्वारा उनका पूजन करना। भुने चने और जौ को बंधुओं के बीच प्रसाद के रुप में बांटना आदि की व्याख्या की गई है।

महाभारत काल में जब राजा परीक्षित को तक्षक सर्प द्वारा काटा गया।

तब उसके पुत्र जनमेजय ने बहुत बड़ा यज्ञ किया उस यज्ञ का नाम था सर्पा सात यज्ञ। यह यज्ञ सर्पों से बदला लेने के लिए किया गया था। जिसमें पृथ्वी के सभी सर्पों को यज्ञ में आहुति देने के लिए मजबूर किया गया। तक्षक राजा भय के कारण इंद्र के पास गए परंतु यज्ञ का प्रभाव इतना था कि इससे भगवान इंद्र और नाग राजा तक्षक दोनों भी यज्ञ की ओर खींचने लगे थे।

इंद्र को बचाने के लिए ब्रह्मा जी ने मनसा देवी की सहायता ली मनसा देवी ने अपनी पुत्री अस्तिका को जन्म जय के पास भेजा और जिस दिन भेजा। उस दिन श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी थी। इसी तिथि के कारण नाग पंचमी के रूप में सर्पों की पूजा की जाने लगी।

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नाग पंचमी
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नाग पंचमी पर्व का महत्व क्या है?

पर्व नाग पंचमी अनेक आपदाओं को नष्ट करने वाला है इसकी पूजा इसलिए भी की जाती है कि इससे बच्चों के कुंडलियों में होने वाले कालसर्प योग के दुष्प्रभाव को कम करना है। इस दिन के पूजन करने से देवी देवता एवं भगवान शिव जी प्रसन्न होते हैं। पृथ्वी के भार को संभालने वाले शेषनाग देवता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का यह एक उपाय है। कीड़े मकोड़े द्वारा फसलों को, पेड़ पौधों को, नष्ट कर देते हैं सर को द्वारा इनका भक्षण कर लिए जाने से वनों एवं फसलों की रक्षा होती है इसलिए इनकी पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है सर्प हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। अज्ञातवस सर्पों की हत्या के पाप से उन्मुक्त होने का एक उपाय इस दिन की पूजा के रूप में मनाया जाता है। सर्प देवताओं की पूजा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है।

नाग पंचमी पर्व कब मनाया जाता है?

यह पर्व श्रावण माह के महीने में मनाया जाता है यह माह पूर्णता शिवजी के लिए समर्पित माह है। नाग पंचमी पर्व प्रतिवर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी को भी नाग पंचमी के रूप में लिखा जाता है परंतु शुक्ल पक्ष की पंचमी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।

नाग पंचमी पर्व की प्रासंगिकता क्या है?

नाग पंचमी पर्व का जितना महत्व ऐतिहासिक है उतना ही महत्व आज भी बना हुआ है नागराज को वनराज भी कहा जाता है वह वनों की रक्षा करते हैं पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने में उनका अहम योगदान होता है। इनके विष से घातक बीमारियों से लड़ने वाली दवाओं का निर्माण किया जाता है। वे पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमें इनका सम्मान करना चाहिए इनकी रक्षा करनी चाहिए और इनका पूजन करना चाहिए। इनके तस्करी एवं हत्या को रोका जाना चाहिए। इसके लिए कठोर कानून बनाने की आवश्यकता भी है। यह हिंदुओं की आस्था का भी एक प्रतीक है इसीलिए इनका पूजन किया जाता है। हमें भी इनका सम्मान करना चाहिए।

नागराज की सबसे अद्भुत प्रतिमा

छठवीं शताब्दी के आसपास कर्नाटक की बादामी की पहाड़ियों में स्थित एक अद्भुत प्रतिमा प्राप्त हुई है; जो तक्षक नागराज की मानी जाती है। यह स्थापत्य कला का एक अद्भुत उदाहरण है इसे देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। यह स्थापत्य कला पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस प्रतिमा में नागराज के पांच सर हैं और उनमें से मानव रूपी भगवान अवतरित हो रहे हैं ऐसा प्रतीत होता है।

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नाग पंचमी
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नाग पंचमी पूजन की तैयारी कैसे करें?

नाग पंचमी पर्व के उत्सव की तैयारी अन्य त्यौहारों की तरह की जाती हैं इस तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान ध्यान करके; अच्छे कपड़े पहन कर, सपरिवार के साथ पूजन सामग्री इकट्ठा करना चाहिए। सभी पूजन करने के लिए घर के सामने वाली दीवार पर गेरू पोत कर नाग की प्रतीकात्मक चित्र बनाना चाहिए और उनकी पूजा की जानी चाहिए। चंदन पुष्प कमल आदि से विशेष पूजा की जानी चाहिए। ब्राह्मण भोज भी इस दिन कराना चाहिए और यथाशक्ति उन्हें सम्मान और दक्षिणा प्रदान करना चाहिए। इससे आपके घर में सदा सुख सुविधाएं एवं संपदा बनी रहेगी।

आज के दिन क्या ना करें?

  • आज के दिन हल चलाना निषिद्ध माना गया है।
  • इस दिन दिन लोहे से बने कड़ाही अथवा तवा का प्रयोग भोजन पकाने में नहीं करना चाहिए।
  •  नई फ़सल से बने भोग को नाग देवताओं को चढ़ाए बिना उसका उपयोग न करें।
  •  आज के दिन गैस से संबंधित कार्य नहीं करना चाहिए।
  •  कोशिश करें कि आज के दिन भूमि ना खुद नहीं पड़े और सब्जियों को न काटना पड़े।

 

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