Bhai Dooj पर्व आखिर क्यों मनाया जाता है? इसका महत्व क्या है?

Bhai Dooj
फोटो-पंजाब केशरी

Bhai Dooj पर्व भाई एवं बहन का एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह सनातन धर्म का एक विशेष उत्सव है। यह प्राचीन काल से वर्तमान काल तक सतत रूप से मनाया जाता रहा है। यह भाई और बहन के प्रति प्रेम, स्नेह, त्याग और समर्पण की अभिव्यक्ति का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई के लिए भगवान से विशेष प्रार्थना करते हैं और उसकी खुशहाली की कामना करती हैं। यह उत्सव संपूर्ण भारत वर्ष में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। आज हम इन इस पर्व की विशेष परिचर्चा करेंगे और इसके विषय में विस्तार से जानेंगे। तो आइये जानते है।

Bhai Dooj पर्व आखिर क्यों मनाया जाता है?

भारतीय परंपरा एवं मान्यता अनुसार अनेक पर्व एवं उत्सव मनाए जाते हैं। Bhai Dooj उन्हीं में से एक विशेष महोत्सव है। भारतीय सनातन धर्म में प्रत्येक पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए वर्ष में अनेक उत्सव और मनाया जाता है जिनसे रिश्तो में नई ऊर्जा, प्रेम, त्याग, समर्पण की भावना पुनर निर्मित की जा सके।
Bhai Dooj  पर्व का भी ही उद्देश्य है कि भाई एवं बहन के बीच स्नेह बना रहे और बहन के प्रति भाई की जिम्मेदारी हमेशा याद रहे।

Bhai Dooj पर्व कब मनाया जाता है?

भाई दूज पर्व प्रत्येक वर्ष दीपावली महोत्सव के बाद दूसरे दिन अर्थात भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया के दिन बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है इस दिन को यम द्वितीया भी कहा जाता है। यह तिथि अत्यंत ही शुभ होती है।

Bhai Dooj पर्व के पीछे ऐतिहासिक एवं पौराणिक मान्यता क्या है?

भाई दूज अत्यंत ही प्राचीन पर्व है इसका ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व एवं मान्यता भी है यह भाई एवं बहनों के लिए यह प्राचीनतम पर्व है। यह आज भी अनवरत रूप से जारी है। भाई दूज पर्व के पीछे पौराणिक गाथाएं भी प्रचलित हैं।

यमराज और यमुना भाई बहन की कहानी

भाई दूज पर्व के पीछे एक कहानी सबसे ज्यादा मान्य है।

प्राचीन समय की बात है उस समय सूर्य और उनकी पत्नी संज्ञा के 2 संतानें थी। पुत्र यमराज एवं पुत्री यमुना थी। संज्ञा सूर्यदेव की किरणों को सहन नहीं कर पाती थी जिसके कारण उन्होंने छाया का रूप लेकर उत्तर की ओर अपने बच्चों को छोड़कर चली गई। मां का ऐसा व्यवहार यमराज को अच्छा नहीं लगा और यमराज बड़ा होकर यमपुरी का निर्माण किया। यहां वह समस्त पापियों को सजा देने का कार्य करते थे।

यमराज साथ में अपनी बहन को भी अपने पास रखा। मृत्युलोक से अनेक मानव पाप कर्म के द्वारा प्रभावित होकर अपने कर्मों के द्वारा कष्ट पाने के लिए यमपुरी आते थे। उन्हें अनेक प्रकार के कष्ट सहने होते थे। यह देखकर यमराज की बहन यमुना अत्यंत ही दुखी रहती थी। अंततः वह दुखी होकर यमपुरी को छोड़कर गोलोक अर्थात विष्णुलोक को चली गई। कुछ समय बाद यमुना को अपने भाई की याद आई और उन्हें अपने घर में बुलाने के लिए संदेश भेजा।

हेमराज जी अत्यंत व्यस्त होने के कारण वे अपनी बहन के पास जाने के लिए समय नहीं निकाल पाते थे। समय ऐसे ही व्यतीत होता रहा और कुछ समय बाद यमराज को भी अपनी बहन यमुना की याद आई यमराज जी ने उस समय अपने दूतों को यमुना जी की खोज करने के लिए भेजा। लेकिन यमदूत अनेक प्रयत्न करने के बाद भी यमुना को नहीं खोज पाए।

तब स्वयं यमराज अपनी बहन यमुना की खोज के लिए निकले।

यमुना विष्णु लोक में मिली। यमराज एवं यमुना एक दूसरे को देखकर बहुत प्रसन्न हुए यमुना ने अपने भाई को बुलाकर उनका स्वागत किया भोजन पकवान खिलाए अपनी बहन यमुना के इस प्रेम से यमराज अत्यंत करना मैं वह प्रेम से भ्रमित हो गए और अपने बहन यमुना को वरदान मांगने के लिए कहा। यमुना प्राणियों में अत्यंत स्नेह रखती थी इसलिए उन्होंने कहा कि हे भाई मैं यह चाहती हूं कि जो भी मनुष्य मेरे जल में शुद्ध मन से स्नान करें वह ध्यान करें तो वह यमपुरी को प्राप्त ना हो।

साथ ही यह वरदान मांगा कि आज के दिन जो भी भाई बहन के यहां जाकर उसका अतिथि संस्कार स्वीकार करेगा, तो वह आपके प्रकोप का सामना उसे ना करना पड़े। इसी कथा अनुसार यह Bhai Dooj पर्व प्रसिद्ध हुआ और प्रतिवर्ष मनाया जाने लगा।

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Bhai Dooj
फोटो- the financial express

Bhai Dooj पर्व का महत्व क्या है?

भारतीय परंपरा में Bhai Dooj पर्व का विशेष स्थान है इसे सनातन धर्म के प्रत्येक जातियों, जनजातियों, सम्प्रदायों एवम् अन्य मजहब के लोगों द्वारा व्यापक रूप से मनाया जाता है। Bhai Dooj पर्व का मुख्य उद्देश्य भाई-बहन के बीच प्यार और सद्भावना को बनाए रखना है।वर्ष भर सभी भाई बहन अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं जिससे वे अपने भाई बहन के कर्तव्यों को भूल जाते हैं।

यह वही क्षण होता है जब एक दूसरे के प्रति प्रेम को याद करके भाई बहन के प्यार को बढ़ाने में सहायक होता है। यह पौराणिक मान्यता के अनुसार जन्म मरण के चक्र से मृत्यु होने का सुनहरा अवसर होता है शास्त्रों में बताएं नियमों एवं कर्मों के द्वारा आप मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। हमें भी प्रतिवर्ष यह पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाना चाहिए और अपनी बहनों का सम्मान करना चाहिए एवम् भाइयों को प्यार देना चाहिए।

Bhai Dooj पर्व की वर्तमान प्रासंगिकता क्या है?

भाई दूज पर्व आज भी उतनी सहर्ष रूप से मनाया जाता है जैसे प्राचीन काल में मनाया जाता था इसकी लोकप्रियता भारतीय सिनेमा एवं टेलीविजन ने इसके महत्व को और बढ़ा दिया है। यह एक दूसरे के प्रति समर्पित भाव प्रकट करने का अवसर होता है जिसमें भाई बहन मिलकर एक दूसरे के दुख दर्द को दूर करने का प्रयास करते हैं। साथ ही इसके साथ कुछ विसंगतियां भी देखने को मिल रही है जिसमें आजकल भाई बहन एक दूसरे को समय नहीं दे पा रहे हैं।

भागदौड़ की जिंदगी में सभी व्यस्त हो गए हैं इसके महत्व में थोड़ी कमी आई है हमें ना भूलना चाहिए कि पारिवारिक व् सामाजिक रिश्ते अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। इसका महत्व कभी भी कम नहीं हो सकता। टूटते बिखरते रिश्तो को हमें सहेजने की आवश्यकता है और इन प्रथाओं का पालन करने की आवश्यकता है;तभी हमारी सारा सनातन परंपरा निरंतर बनी रहेगी और इसकी मान्यता भी भविष्य में स्थापित रहेगी।

Bhai Dooj महोत्सव कैसे मनाते हैं।

भाई दूज पर्व मनाने की परंपरा तो सर्वत्र विद्यमान है परंतु इसकी तैयारी अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग रूपों में की जाती है परंतु सभी का एक ही उद्देश्य है कि भाई बहनों के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता पूर्ण आभार जताना Bhai Dooj पर्व मनाने के लिए उस दिन बहन के द्वारा पूजन सामग्री इकट्ठा कर जायफल हरे सुपारी फूल गेंदा फूल आदि सभी कट्ठा घर के दीप जलाकर मीठा आदि सामग्री एक थाली में रखकर,सभी भाइयों को बुलाकर एक साथ किसी ऊंचे स्थान पर बैठा कर उनके सिर पर तिलक लगाना चाहिए।

सभी भाइयों को सर पर रुमाल या कपड़े जरूर रखें। बहनों को एक के बाद एक भाइयों को आरती दिखाना चाहिए और हाथ में कलावा बांधने को शुभ माना जाता है। इसके बाद भाई के मुख्य में जो भी मीठा हो वह खिलाना चाहिए भाई भी अपनी बहनों को वस्त्र आभूषण पैसे आदि देकर चरण स्पर्श करना चाहिए। बहन छोटी हो अथवा बड़ी हमें उनका प्रणाम करना ही चाहिए। संध्या के समय बहने द्वार पर दीया जलाकर यमराज जी के नाम से अवश्य रखनी चाहिए।

Bhai Dooj
फोयो- द जनमत

यमराज व् यमुना के लिए दीप दिखाते वक्त मंत्र भी पढ़ना चाहिए-

यमराज की पूजा के लिए मन्त्र:-

धर्मराज नमस्तुभ्यं नमस्ते यमुनाग्रज।
पाहि मां किंकरैः सार्धं सूर्यपुत्र नमोऽस्तु ते।।

यमुना पूजा के लिए मन्त्र]

यमस्वसर्नमस्तेऽसु यमुने लोकपूजिते।
वरदा भव मे नित्यं सूर्यपुत्रि नमोऽस्तु ते॥

इस प्रकार मंत्र पढ़कर भगवान का ध्यान करना चाहिए और उनसे प्रार्थना करनी चाहिए कि हमारे घर में सुख शांति प्रेम सौहार्द्र सम्मान बना रहे एक दूसरे के प्रति समर्पण भाव बना रहे और आपका आशीर्वाद हमेशा हमें प्राप्त हो हमारे परिवार में अकाल मृत्यु जैसे दुखों से हमारी रक्षा करें। इस प्रकार ध्यान करने से भगवान निश्चित ही आपके परिवार की रक्षा करते हैं और आपको मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।

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नोट:- सम्पूर्ण व्रतों एवम् त्योहारों से संबंधित कोई प्रश्न, कई भ्रांतियां उत्पन्न हो या कोई अन्य सलाह लेना हो तो आप हमारे ज्योतिषाचार्य पंडित अभिनव पांडेय जी से 7999314964 पर संपर्क कर सकते हैं। वे उचित सन्मार्ग प्रदान करेंगे।

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