EVM मशीन क्या है? EVM का आविष्कार कब और किसने किया?

EVM
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दोस्तों चुनाव के समय आपने EVM मशीन के बारे में जरूर सुना और इसको देखा होगा शायद प्रयोग भी किया हो। कई बार मन में बहुत सारे प्रश्न उठते हैं कि यह कैसी मशीन है? कैसे बनती है? इसका कार्य करने तरीका कैसा है और क्या इस मशीन में गड़बड़ी हो सकती है?

आदि प्रश्न हमारे मन में सदा उठते हैं आज हम आपके इन्हीं प्रश्नों व् आशंकाओं का सरल शब्दों में उत्तर देंगे। जिससे आपके मन के साथ सारे भ्रम दूर हो जाएंगे। तो आइए दोस्त दोस्तों ईवीएम मशीन से जुड़े समस्त तथ्य आपके सामने रखते हैं-

EVM मशीन क्या है?

ईवीएम मशीन चुनाव के लिए प्रयुक्त वोटिंग मशीन है। EVM का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन होता है। इस मशीन के माध्यम से चुनाव के समय वोट डालने के लिए प्रयोग करते हैं। यह एटीएम मशीन की तरह ही एक मशीन है लेकिन कार्य अलग अलग हैं। यह मशीन वोटों की गणना एवम् उसे डिवाइस में सुरक्षित रखती रखती है। समयानुसार उसे वोटों की गणना प्राप्त कर पुनः उपयोग किया जा सकता है।

EVM मशीन का आविष्कार कब और किसने किया?

सर्वप्रथम विश्व में EVM मशीन का आविष्कार वर्ष 1898 में, गिलेस्पी और आविष्कारक जैकब मायर्स, जिनके पेटेंट ने गिलेस्पी के काम की जानकारी दी, ने एक कंपनी का आयोजन किया जो स्वचालित वोटिंग मशीन कंपनी बन गई। मायर्स ने एक वोटिंग मशीन का पहला प्रदर्शन 1892 लॉकपोर्ट, न्यूयॉर्क, शहर के चुनाव में दिया।

अग़र भारत देश में इसके सर्वप्रथम निर्माण की बात करें तो-

हनीफा ने पहली भारतीय वोटिंग मशीन का आविष्कार किया, राजपत्रित “इलेक्ट्रॉनिक रूप से संचालित मतगणना मशीन” 15 अक्टूबर 1980 में किया। इसे तमिलनाडु के छह शहरों में आयोजित सरकारी प्रदर्शनियों में उनका मूल डिज़ाइन (इंटीग्रेटेड सर्किट का उपयोग करके) जनता के लिए प्रदर्शित किया गया था।

भारत में EVM मशीन का निर्माण कहां होता है और कौन करता है?

भारत में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का निर्माण केंद्रीय निर्वाचन आयोग की अनुमति से भारत इलैक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बैंगलोर एवम् इलेक्ट्रानिक्स कारपोरेशन आफ इंण्डिया लिमिटेड, हैदराबाद द्वारा किया जाता है। मशीनों के निर्माण की संख्या भी केंद्रीय निर्वाचन आयोग ही तय करता है। EVM को 6 वोल्ट की एक बैटरी से संचालित किया जाता है।

 

EVM मशीन क्या है? EVM का आविष्कार कब और किसने किया?
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EVM मशीन की कीमत क्या होती है?

वर्ष 2006 से 2010 के बीच बनी ईवीएम मशीनों को M2 कहा जाता है इसकी कीमत 8700 प्रति मशीन होती है, एवं 2013 के बाद की बनी मशीन M3 की कीमत 17000 प्रति मशीन होती है। एक EVM मशीन मैं लगभग 3840 वोट डाला जा सकता।

EVM किस तरह काम करती है?

EVM के दो हिस्से होते हैं,

एवम् के दो भाग होते हैं

1. नियंत्रण इकाई

2. बैलेटिंग यूनिट

नियंत्रण इकाई को मतदान अधिकारी के पास रखा जाता है, और मतदान इकाई को मतदान डिब्बे के अंदर रखा जाता है, जिसका उपयोग वोट डालने के लिए किया जाता है।

एक हिस्सा नियंत्रण के रूप में काम करता है जो मतदान अधिकारी के पास रहता है। वहीं इसका दूसरा हिस्सा मतदान ईकाई के रूप में काम करता है जिसे मतदान कक्ष के अंदर रखा जाता है। मतदान अधिकारी सबसे पहले मतदान बटन को दबाता है जिसके बाद मतदान कक्ष में उपस्थित मतदाता अपने पसंदीदा प्रत्याशी का चुनाव उसके पार्टी चिन्ह के सामने लगे नीले बटन को दबाकर करता है।

मशीन तार से जुड़े रहते हैं मशीन को नियंत्रित करने के लिए सिलिकॉन से बने ऑपरेटिंग प्रोग्राम का इस्तेमाल किया जाता है। एक बार इसका निर्माण होने के बाद इसे बनाने वाला भी इसमें कोई बदलाव नहीं कर सकता है।

ईवीएम बटन को एक ही बार दबा सकते हैं, क्योंकि मतदान केंद्र पर उम्मीदवार के नाम के आगे के बटन को एक बार दबाने के बाद यह मशीन बंद हो जाती है। अगर कोई मतदाता दो बटन एक साथ दबाने का प्रयास करता है तो मतदान दर्ज नहीं होता है।

आजकल ईवीएम मशीन का प्रयोग चुनाव में अधिक क्यों किया जा रहा है?

EVM मशीन का प्रयोग भारत के ज्यादातर चुनाव में प्रयोग किया जाता है 2004 के लोकसभा चुनाव से नियमित रूप से EVM मशीन का प्रयोग किया जाता है। अगर इसके कारणों पर प्रकाश डालें तो ज्ञात होता है कि इसके माध्यम से पारदर्शिता, चुनाव की प्रकिया की सरलता, 90% से अधिक सुरक्षित, एवम् समय के साथ परिवर्तन प्रमुख कारण है

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EVM मशीन को कौन कौन से देशों ने बैन कर रखा है?

इस मशीन के अनेक लाभ के बावजूद अनेक देशों के द्वारा इस पर बैन लगा रखा है, उनका मानना है कि यह लोकतांत्रिक पद्धति नहीं या असंवैधानिक है। बैन लगाने वाले प्रमुख देशो में सन्युक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड, नीदरलैंड एवम् जर्मनी आदि हैं। इसके अलावा ऐसे भी देश शामिल है जहां लोकतंत्र नाम मात्र के लिए या अन्य शासन प्रणाली अपनाई गई है।

क्या EVM मशीन को हैक या नियंत्रित किया जा सकता है?

EVM मशीन का प्रयोग विधानसभा चुनाव, संसदीय चुनाव व् स्थानीय निकायों के चुनावों में किया जाता है पर कई बार इसके प्रमाणिकता पर प्रश्नचिन्ह भी उठाया जाता है। चुनाव आयोग द्वारा इसकी प्रमाणिकता की जाँच को साबित करने के लिए खुली चुनौती देती है और देश के हैकर्स को आमन्त्रण देकर सिद्ध करती है कि यह प्रमाणिक है। रिसर्च में भी यह बात सिद्ध की जा चुकी है फिर भी कई राजनीतिक दल इस पर प्रश्न उठाते रहते हैं।

Evm मशीन का भारत में प्रथम प्रयोग कब और कहाँ हुआ?

भारत में ईवीएम का पहली बार इस्तेमाल 1982 में केरल के 70-पारुर विधानसभा क्षेत्र में किया गया था।पहले भारतीय EVM का आविष्कार 1980 में “एम बी हनीफा” के द्वारा किया गया था जिसे उसने “इलेक्ट्रॉनिक संचालित मतगणना मशीन” के नाम से 15 अक्तूबर 1980 को पंजीकृत करवाया था।

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 1989 में “इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड” के सहयोग से भारत में ईवीएम बनाने की शुरूआत की गई थी। प्रयोग के तौर पर पहली बार EVM का इस्तेमाल 1998 में राजस्थान मध्य प्रदेश और दिल्ली विधानसभा के चुनाव में हुआ।

1999 के गोवा विधानसभा चुनाव में पहली बार ईवीएम मशीन का पूरे राज्य में विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल हुआ। इसके बाद सभी अधिकांश राज्यों में नियमित रूप से इसका प्रयोग किया जाने लगा।

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क्या EVM चुनाव संबंधी समस्याओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ?

भारत में 80 करोड़ से ज्यादा मतदाता है हजारों करोड़ों रुपए चुनाव में लग जाते हैं , एवं इसकी प्रक्रिया भी काफी जटिल होती है इतने बड़े स्तर पर गणना करने के लिए इंसानों के लिए अत्यंत कठिन कार्य है इसके लिए मशीन का ही उपयोग करना उचित होगा।

ईवीएम मशीन का जब से चुनाव में प्रयोग प्रारंभ हुआ काफी हद तक चुनाव संबंधी समस्याओं को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है पहले बूथ कैपचरिंग मतदान पेटी का चुराना एवं ऐसी अनेक विसंगतियां विद्यमान थी जिससे चुनाव में पारदर्शिता का अभाव दृष्टिगोचर होता था कुछ कमियां ईवीएम मशीन में हो सकती हैं परंतु यह आज अत्यंत ही प्रासंगिक एवं अपरिहार्य हो गया है।

चुनाव के लिये ईवीएम के साथ कौन सी मशीन अत्यंत जरूरी है?

ईवीएम मशीन की प्रमाणिकता को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए वोटिंग के समय वोटर वेरी फायर, एबल पेपर , ऑडिट ट्रेल मशीन वीवीपैट का उपयोग किया जाता है इसके माध्यम से जब वोट वोट डालने वाला वोट  डालता है तो वह इस मशीन के द्वारा यह देख सकता है की वोट किस पार्टी के उम्मीदवार या निर्दलीय उम्मीदवार को गया है।

यह केवल 7 सेकंड के लिए दिखाई देता है, इससे वोटर निश्चिंत हो जाता है कि मेरा जो वोट है मेरे मनपसंद के उम्मीदवार को ही गया है इससे चुनाव सुधार काफी हुआ है और सभी दल इसके पक्ष में हैं। भविष्य में यह सभी चुनाव में प्रयोग किया जा सकेगा।

बैलेट पेपर क्या है?

बैलेट पेपर एक प्रपत्र है यह चुनाव के समय प्रयोग किया जाता था भारत के स्वतंत्रता के बाद 1951 52 में प्रथम आम चुनाव हुए इसी आम चुनाव से इस बैलेट पेपर का प्रयोग किया गया, जिसमें उम्मीदवारों के नाम वह चुनाव चिन्ह इसमें अंकित होते थे इस प्रपत्र में वोटर मनपसंद के उम्मीदवार को देखकर उसके सामने में सिल लगा देता था।

अर्थात वह उम्मीदवार को छू लेता था और वह बैलट पेपर एक बक्से में बंद कर दिया जाता था। जब चुनाव के बाद वोटों की गणना होती थी उस समय इसे खोल कर इसकी गणना की जाती थी। वर्तमान में इसका प्रयोग अत्यंत कम हो गया है , इसकी जगह EVM मशीन व वीवीपैट मशीन ने ले लिया है।

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