Insurance से जुड़ी हर जानकारी जो आपको जानना जरुरी है।

Insurance

साथियों आज हम विभिन्न Insurance  और जीवन बीमा से संबंधित जानकारी आपसे साझा करेंगे। बीमा है क्या? इसका महत्व क्या है? प्रकार क्या है? किस तरह हमारे जीवन को प्रभावित करता है?

यह कितना प्रासंगिक है? भविष्य में बीमा की क्या स्थिति होगी? भारत में कौन-कौन से जीवन बीमा कंपनियां अधिसूचित की गई हैं? आदि बहुत से अन्य प्रश्न जो अत्यंत जरूरी हैं।

उनकी जानकारी हम अपने इस लेख के माध्यम से पाठकों को उपलब्ध कराएंगे; ताकि वे इसका लाभ उठाकर उचित बीमा का चयन कर सके और अपने जीवन को सुरक्षित बना सकें।

जीवन बीमा :- जीवन बीमा हमारे जीवन में आने वाले समस्याओं एवम प्राकृतिक या अप्राकृतिक दुर्घटना हो जाने पर अथवा मृत्यु हो जाने पर बीमा का लाभ उस व्यक्ति को अथवा उसके परिवार को प्राप्त होता है।

Jeevan Bima एक दस्तावेज की तरह होता है, जिसमें विभिन्न नियम व शर्तें वह निश्चित राशि दर्ज होती है यह उस समय काम आता है जब बीमा धारी की मृत्यु या दुर्घटना होती है। वह बीमा के लिए दावा कर सकता है, जिसमें उसे निर्धारित धनराशि बीमा कंपनी द्वारा प्रदान की जाती है।

जीवन बीमा के अंतर्गत व्यक्ति के जीवन से संबंधित सुरक्षा संबंधी बीमा का प्रावधान किया जाता है, भारत में जीवन बीमा की शुरुआत ब्रिटेन द्वारा की गई। जीवन बीमा की विषय वस्तु मानव को केंद्र में रखकर माना गया है हम जीवन बीमा को जीवन आश्वासन भी कह सकते हैं ।

भारत में सर्वप्रथम बीमा कंपनी की स्थापना कब की गई?

भारत देश में प्रथम बार जीवन बीमा की शुरुआत 1918 में ओरिएंटल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के नाम से शुरू की गई।

सामान्य बीमा:- सामान्य बीमा के अंतर्गत व्यक्ति के जीवन से संबंधित वस्तुओं आदि का बीमा किया जाता है। यह ब्रिटेन की देन है। देश की पहली सामान्य बीमा कंपनी ट्राइटन इंश्योरेंस कंपनी 1850 में कोलकाता में स्थापित किया गया।

इंडियन मर्केंटाइल इंश्योरेंस कंपनी जो देश की सामान्य बीमा कंपनी है इसकी स्थापना 1907 में मुंबई में की गई। नवंबर 1972 में भारत सरकार ने भारतीय साधारण बीमा निगम जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन के नाम से एक सरकारी कंपनी की स्थापना की गई

बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण क्या है?

देश में बीमा के क्षेत्र में बीमा कंपनियों पर नियंत्रण रखने तथा उनके क्रियान्वयन हेतु नियमावली के निर्माण के लिए बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण का गठन 19 अप्रैल 2000 को किया गया विभिन्न माध्यमों से बीमा कंपनियों पर नियंत्रण रखती है, तथा उन्हें मान्यता प्रदान करती है। इसे आईआरडीए के नाम से भी जाना जाता है।

ये भी पढ़े – वन नेशन वन राशन कार्ड क्या है? इस कार्ड के क्या लाभ है ?

Insurance

 जीवन बीमा :- Life Insurance

भारत में जीवन बीमा ब्रिटेन की देन है। सर्वप्रथम 1818 में एक ब्रिटिश फर्म ने कोलकाता में एक ओरिएंटल लाइफ Insurance कंपनी की स्थापना की थी, इसके बाद 1823 में मुंबई में मुंबई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी व 1829 में मद्रास में मद्रास इक्विटेबल लाइफ इंश्योरेंस सोसाइटी की स्थापना की गई।

18 से 71 तक भारतीयों के जीवन को सामान्य से नीचे मानते हैं उनके जीवन के बीमे के लिए 15 से 20% तक अधिक प्रीमियम बीमा कंपनी द्वारा वसूला जाता था। 1871 में स्थापित बॉम्बे म्युचुअल लाइफ Insurance सोसायटी बीमा कंपनी थी जिसने सामान्य ही भारतीयों के जीवन का प्रारंभ किया। जीवन बीमा व्यवसाय के लिए पहली बार 1912 में एक भारतीय बीमा कंपनी एक्ट लागू किया गया।

जिसका उद्देश्य भारत में कार्यरत भारतीय तथा विदेशी बीमा करने वालों के द्वारा जीवन बीमा तथा अन्य प्रकार के बीमा से संबंधित सांख्यिकीय सूचनाएं सरकार को उपलब्ध कराना था।

1938 में प्रयुक्त उपयुक्त प्रकार के सभी अधिनियम को समन्वित करके व्यापक प्रावधानों के साथ Insurance एक्ट 1938 लागू किया गया स्वतंत्रता के बाद 1950 में इस अधिनियम में संशोधन किए गए 1956 तक देश में 154 भारतीय 16 गैर भारतीय बीमा कंपनियां तथा 75 प्रोविडेंट समितियां जीवन बीमा व्यवसाय में कार्यरत थी।

19 जनवरी 1956 को केंद्र सरकार ने इन समस्त 245 भारतीय तथा विदेशी बीमा कंपनियों को अपने अधिकार में ले लिया तथा 1 सितंबर 1956 को इनका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया।

संसद के एक अधिनियम के तहत सितंबर 1956 में 5 करोड रुपए की भारत सरकार की पूंजी के साथ भारतीय जीवन बीमा निगम लाइफ Insurance कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की स्थापना की गई।

बीमा क्षेत्र में सुधार के लिए गठित मल्होत्रा समिति ने एलआईसी के लिए ₹50000000 के पूंजी आधार को बढ़ाकर 200 करोड़ करने के सिफारिश की थी किंतु सरकार ने इस 5 करोड रुपए के वर्तमान आधार को बढ़ाना स्वीकार नहीं किया है। जीवन बीमा के राष्ट्रीयकरण का उद्देश्य बीमा के व्यापक प्रसार के साथ-साथ जनता के जनता की बचत को देश के हित में जुटाना था।

राष्ट्रीयकरण से पहले देश में 245 निजी बीमा कंपनियां थी जो अधिकांशतः शहरी क्षेत्रों के लिए काम करती थी वर्तमान में जीवन बीमा निगम अपने मुंबई स्थित मुख्यालय तथा साथ क्षेत्रीय कार्यालयों के द्वारा महत्वपूर्ण शहरों में स्थित अपने 101 मंडली कार्यालयों तथा समस्त देश में फैले 2048 से अधिक शाखा कार्यालयों के माध्यम से काम करता है।

सामान्य बीमा:- Insurance

भारत में सामान्य बीमा का आविर्भाव भी ब्रिटेन से हुआ, प्रारंभ में यह व्यवसाय ब्रिटिश तथा अन्य विदेशी बीमा कंपनियों की एजेंसियों के माध्यम से किया गया था। देश में पहली सामान्य बीमा कंपनी ट्राइटन Insurance कंपनी लिमिटेड कोलकाता में 18 50 में स्थापित की गई थी।

इस कंपनी में अधिकांश एयर अंग्रेजों के थे भारतीयों के द्वारा इस प्रकार की पहली कंपनी इंडियन मर्केंटाइल Insurance कंपनी लिमिटेड मुंबई में 1960 में स्थापित की गई। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश में लगभग 40% सामान्य बीमा व्यवसाय ब्रिटिश तथा विदेशी कंपनी द्वारा संपन्न किया जाता था, प्राप्ति के बाद यह अंश तेजी से कम होता चला गया।

राष्ट्रीयकरण से पूर्व के एक कदम के रूप में देश में कार्यरत समस्त सामान्य बीमा कंपनियों का प्रबंध 1971 में सरकार ने अपने हाथ में ले लिया और 1 जनवरी 1973 को सरकार ने सामान्य बीमा व्यवसाय राष्ट्रीयकरण अधिनियम 1972 के तहत सामान्य बीमा व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण कर दिया।

सन 1973 के पूर्व साधारण बीमा प्रायः बड़े शहरों तक ही सीमित था तथा मुख्य रूप से संगठित व्यापार एवं उद्योग की आवश्यकताओं की पूर्ति करता था। नवंबर 1972 में भारत सरकार ने भारतीय साधारण बीमा निगम जीआईसी के नाम से एक सरकारी कंपनी की स्थापना की जिसने एक जनवरी 1973 से कार्य करना प्रारंभ किया था राष्ट्रीयकरण से पहले देश में काम कर रही 107 भारतीय एवं विदेशी कंपनियों को चार प्रमुख कंपनियों में विभाजित कर दिया गया इनके नाम व् मुख्यालय हैं~

  • नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड~ कोलकाता
  • न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड~मुम्बई
  • ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड~दिल्ली
  • यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड~ चेन्नई।

साधारण बीमा निगम की चार सहायक कम्पनियाँ एक दूसरे से स्पर्धा रखते हुए देश भर में अपना कारोबार करती रही हैं। भारतीय साधारण बीमा निगम जीआईसी को 3 नवंबर 2000 से इसकी सहायक कंपनियों से विधिवत अलग कर दिया गया।

जीआईसी को भारतीय बीमा करता अधिसूचित किया गया है। इसने सीधा बीमा व्यवसाय एवं फसल बीमा बंद कर दिया है। वर्तमान में जीआईसी और अन्य चारों कंपनियों की अंश पूंजी सरकार के पास है।

यह सभी 5 संस्थाएं सरकारी कंपनियां है और कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत हैं। चार कंपनियों ने एक एसोसिएशन बना लिया है जिसे जनरल Insurance पब्लिक सेक्टर एसोसिएशन ऑफ इंडिया कहते हैं।

ये भी पढ़े – Atal Pension Yojana क्या है? इसके क्या क्या लाभ हैं।

Insurance

Life insurance policy कितने प्रकार की होती है?

भारतीय कंपनी द्वारा अलग-अलग प्रकार की अलग-अलग इंश्योरेंस पॉलिसी जनता के लिए बनाई जाती है मुख्य रूप से अगर इनके प्रकारों की बात की जाए तो यह 7 प्रकार के होते हैं जिनके द्वारा आम जनता पॉलिसी का लाभ ले सकती हैं

यूलिप बीमा पॉलिसी:-

Ulip Bima policy में सुरक्षा और निवेश दोनों का प्रावधान रहता है सामान्य तौर पर एंडोमेंट इंश्योरेंस पॉलिसी और मनी बैक पॉलिसी जिसकी हम चर्चा कर चुके हैं यह उसी के हद तक पक्का हो होता है,

परंतु इसमें एक कंडीशन यह होती है कि इसमें कोई गारंटी नहीं होती है क्योंकि इसमें बांड और शेय लगाया जाता है और म्यूच्यूअल फंड के रूप में आपको इसके शेयर मिल जाते हैं इस दौरान अगर मार्केट में उतार-चढ़ाव होता है तो इसका प्रभाव इस बीमा पॉलिसी में भी पड़ता है।

aajeevan Life Insurance:-

यह लाइफ इंश्योरेंस आपको जीवन भर के लिए सुरक्षा बीमा प्रदान करती है और इसमें कोई धर्म नहीं होता पॉलिसी धारक की मृत्यु हो जाने पर इसका लाभ उसके नॉमिनी को होता है वह इसके लिए क्लेम कर सकता है इसके लिए उम्र सीमा 65 से 70 वर्ष निश्चित होती है। इसके बाद अगर पॉलिसी धारक की मृत्यु हो जाती है तो वह उसके नॉमिनी लोग क्लेम नहीं कर सकते।

इसका प्रीमियम अधिक होता है अतः कम लोग ही आजीवन लाइफ इंश्योरेंस का प्रयोग करते हैं। कुछ आपातकालीन परिस्थितियों में आंशिक धनराशि इसमें से निकाली जा सकती है आप इस पॉलिसी को अगर अपना आते हैं तो आप इसके सहारे लोन भी ले सकते हैं।

money bank insurance policy:-

एंडोमेंट पॉलिसी की ही तरह यह भी एक इंश्योरेंस पॉलिसी है यह दो चीजों से मिलकर बना है इसमें निवेश और बीमा शामिल होते हैं इसमें कुछ मात्रा में अंतर भी होता है क्योंकि लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी में जो बोनस के रूप में एश्योर्ड सम पॉलिसी टर्म जब आप नहाते हैं तो उस दौरान किस्तों को वापस कर सकते हैं। जबकि आखिरी किस्त कौन हो जाती है तब किस्त प्राप्त होती है। money bank insurance policy को अपनाने वाले पॉलिसी धारक की की मौत इस दौरान हो जाती है तो उसके नॉमिनी को इंश्योरेंस का लाभ मिलता है परंतु इस के किस्से या प्रीमियम अधिक दर की होती है।

retirement Bima policy:- Insurance

यह एक retiremental Bima policy है, इसमें किसी भी प्रकार का इंश्योरेंस कवर प्राप्त नहीं होता है। आप इस बीमा पॉलिसी के के लिए आवेदन कर सकते हैं जब आप यह चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद यह प्लान सक्रिय हो। retirement Bima policy में आपके नॉमिनी को भी पेंशन के लिए निश्चित राशि प्रदान करने का प्रावधान होता है आप इसका प्रीमियम जमा करने के लिए सालाना या अर्धवार्षिक या वार्षिक रकम का भुगतान कर सकते हैं।

child insurance policy:-

यह पॉलिसी बच्चों के लिए होती है, परंतु इस पॉलिसी को बच्चे ना लेकर बालकों द्वारा लिया जाता। शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं से निपटने के लिए इस पॉलिसी को बालकों द्वारा अपनाया जाता है इस दौरान अगर पॉलिसी धारक बच्चे की मृत्यु जाती है तो उसकी उसके लिए जमा की गई समस्त पॉलिसी राशि का भुगतान कर दिया जाता है परंतु इससे पॉलिसी खत्म नहीं होती। इस दौरान जो भुगतान किया जाता है उसे भविष्य के दान के लिए माफ कर दिया जाता है अर्थात उसे प्रीमियम जमा नहीं करने होंगे और बच्चे को भी निश्चित समय तक इस बीमा पॉलिसी का लाभ होगा।

Term insurance policy:-

यह इंश्योरेंस की एक जन प्रचलित पॉलिसी है इसमें जो प्लान होता है वह एक निश्चित अवधि के लिए होता है जैसे 10 साल 20 साल या 30 साल के लिए होता है इनमें से किसी एक को आप चुन सकते हैं इसमें किसी भी प्रकार का मेच्योरिटी बेनिफिट प्राप्त नहीं होता है यह आपको बिना लाइफ कवर के सेविंग या प्रॉफिट कंपोनेंट प्रदान करती है परिणाम स्वरुप यह इस की दरें प्रीमियम दरें सस्ती होती हैं। प्लानिंग के दौरान अगर पॉलिसी धारक की मृत्यु जाती है तो उसका लाभ उसके उत्तराधिकारी को प्राप्त होता है।

Endowment Bima policy:-

यह भी एक जीवन बीमा जैसी पॉलिसी है इसमें बीमा के रूप में एवं निवेश दोनों के रूप में शामिल होते हैं। यह हमें निश्चित समय के लिए सुरक्षा प्रदान करती हैं। इस पॉलिसी में गंभीर बीमारी होने पर भी बीमा राशि प्रदान करने का प्रावधान है परंतु कुछ शर्तों के अनुसार।
बीमा की मुख्य विशेषताएं एवं इसकी प्रकृति क्या है?

  1.  यह जोखिम से सुरक्षा प्रदान करता है।
  2. जोखिमों को कम करने का एक तरीका और एक माध्यम है।
  3. जोखिम का बीमा धारकों से बीमा कर्ता को हस्तांतरित किया जाता है।
  4. बीमा एक अनुबंध की तरह वैधानिक होता है।
  5. यह सहकारिता की भावना पर आधारित एक तरीका है।
  6. बीमा एक पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के क्रियान्वयन का तरीका है।
  7. यह किसी भी दुर्घटना या हानियों की जोखिम को निश्चित करता है।
  8. इसके राशि का भुगतान तभी होता है जब घटना घटित हो जाती है।
  9. बीमा भुगतान का आधार होता है अर्थात बीमा होने पर ही भुगतान के लिए क्लेम किया जा सकता है।
  10. बीमा जोखिम के मूल्यांकन व निर्धारण करने का एक माध्यम है।
  11. इसका क्षेत्र अंत्यंत ही व्यापक है।
  12. बीमा एक संस्थागत ढांचा की भांति कार्य करता है।

ये भी पढ़े – प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना क्या है? इसका लाभ आप कैसे उठाये ।

Insurance

बीमा पॉलिसी अपनाने से क्या~क्या लाभ होते हैं?

पॉलिसी अपनाने से अनेक प्रकार से बीमा धारकों को लाभ प्राप्त होता है। अगर इनके लाभों की बात की जाए तो यह बचत वह मितव्ययिता को प्रोत्साहन देता है जो जोखिमों से हमें सुरक्षा प्रदान करता है। विनिवेश व विनियोग को प्रोत्साहन में मदद करता है।

बीमा धारकों व उसके उत्तराधिकारी की पूर्ण सुरक्षा का उत्तरदायित्व लेता है। बीमा करने से करों में छूट मिलती है। आय क्षमता का पूंजीकरण आसानी से हो सकता है। इसके माध्यम से ऋण सुविधाएं भी प्राप्त की जा सकती हैं।

वैधानिक संबंधी दायित्वों से बीमा धारकों को मुक्ति मिल जाती है। इससे कार्य क्षमता में भी वृद्धि होती है। बीमा धारकों में मानसिक शांति बनी रहती है आत्मनिर्भरता व स्वावलंबन को यह प्रोत्साहन करता है। भविष्य में होने वाली आवश्यकताओं का यह विधिवत नियोजन करता है। प्लानिंग करता है…

मानव संसाधन के विकास में यह उपयोगी सिद्ध होता है। कर्मचारी सुरक्षा योजनाओं का आसानी से प्रबंधन किया जा सकता है। कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा भी होती है। महत्वपूर्ण सामाजिक प्रतिष्ठित व्यक्तियों की हानि से सुरक्षा में सहायक होता है।

रोजगार के अवसरों का विकास आसानी से होता है। इससे अनेक लोगों को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होते हैं। विदेशी व्यापार को प्रोत्साहन भी होता है। सेवा क्षेत्र के उपक्रमों का विकास भी होता है।

लघु एवं कुटीर उद्योगों के होने वाली हानियों को दूर करता है। आधारभूत संरचना संबंधी औद्योगिक विकास को यह मजबूत बनाता है। पारिवारिक जीवन में स्थायित्व प्रदान करता है।

सामाजिक बुराइयों को दूर करने का प्रयास करता है। शिक्षा को प्रोत्साहन मिलता है। सतर्कता को प्रोत्साहन, सभ्यता एवं संस्कृति का विकास होता है। सामाजिक एवं इससे संबंधित उत्थान संबंधी कार् बीमा की कौन-कौन सी कमियां एवं सीमाएं हैं?

नीमा हमें अत्यंत व्यापक रूप से जीवन को सुरक्षित प्रदान करने में सहायक सिद्ध होता है परंतु इसकी कुछ सीमाएं और कमियां भी हैं कि जिसे जानना भी बहुत जरूरी है। बीमा सभी जोखिमों का बीमा कराना संभव नहीं है। इसकी दरें अत्यंत ही ऊंची होने के कारण यह जन सामान्य बीमा का लाभ नहीं ले पाता।

इसके सामने कुछ नैतिक संकट भी होते हैं। बीमा लाभकारी विनियोग नहीं है, ऐसा विद्वानों द्वारा कहा जाता है। बीमा कंपनियों के का संचालन अत्यंत ही कष्ट में होता है।

बीमा केवल वित्तीय मूल्य तक ही सीमित होता है या अन्य मानसिक शारीरिक और अन्य पीड़ा को दूर करने में सक्षम नहीं होता कुछ केवल सहकारी सहयोग पर ही निर्भर होते हैं। इसकी अन्य और भी कमियां हैं जिससे इसकी सीमाओं का ज्ञान होता है।

ये भी पढ़े – Sukanya Samriddhi Yojana क्या है। जानिए सब कुछ।

किन परिस्थितियों में बीमा का लाभ बीमा धारकों को प्राप्त नहीं होता है?

Bima policy को अपनाने से अनेक लाभ व अप्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होते हैं, परंतु कुछ परिस्थितियों में बीमा का लाभ बीमा धारक को आपातकालीन परिस्थितियों में प्राप्त नहीं होता है। यह बीमा कंपनियों के नियम शर्तों के अनुसार कार्य करता है जब व्यक्ति अपने जीवन का जोखिम अत्यंत लेता है,

जैसे खतरों का खिलाड़ी ऐसे व्यक्तियों का बीमा होने पर भी क्लेम करने के बाद उनके क्लेम को अनुमति नहीं मिलती है, ऐसा व्यक्ति जो अत्यंत नशा करता है और उस दौरान नशे के दौरान मृत्यु हो जाए तो ऐसे व्यक्ति को बीमा क्लेम करने पर भी राशि मिलना कंपनी पर निर्भर होता है कि वह बीमा की राशि प्रदान करें अथवा नहीं। किसी ऐसे खाताधारक जिसकी किसी पूर्व बीमारी से मृत्यु हो जाए ऐसी परिस्थितियों में बीमा का भुगतान कंपनी द्वारा नहीं किया जाएगा।

मोटर बीमा हम क्यों खरीद लेते हैं?

मोटर बीमा हमें दुर्घटना के समय सुरक्षा प्रदान करता है और उससे होने वाली व्यापक क्षति को दूसरे के ऊपर डाल देता है अगर बीमा धारक गाड़ी या मोटर का बीमा कराया है तो इससे उसे अत्यंत लाभ हो जाएगा और तृतीय पक्ष के जीवन और जो क्षति हुई है उससे कंपनी क्षतिपूर्ति प्रदान करेगी ऐसा प्रावधान सार्वजनिक स्थल पर किया गया है यदि वाहन सार्वजनिक चलाया जा रहा है तो बीमा नहीं है उस स्थिति में 1988 के अधिनियम मोटर वाहन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध होता है अतः मोटर वाहन का बीमा कराना अनिवार्य है।

अधिक जानकारी के लिए आप इनके वेबसाइट https://www.irdai.gov.in/ पर जा सकते है।

तो दोस्तों ये था बिमा पालिसी से जुड़ी कुछ जरुरी जानकारी। शेयर जरूर करे। धन्यवाद्

पसंद आया तो शेयर करे।

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*