janmashtami क्या है? और क्यों मनाया जाता है।

janmashtami

janmashtami  भारत में प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। यह व्यापक रूप से देश के विभिन्न हिस्सों और विशेष रूप से उत्तर भारत में विभिन्न स्थानों में मनाया जाता है। janmashtami में बहुत सारे लोग हिस्सा लेते हैं और बहुत हद तक खुद का आनंद लेते हैं।

जन्माष्टमी को कृष्ण janmashtami  के रूप में भी जाना जाता है और हिंदू समुदाय के लोगों द्वारा मनाया जाता है। यह भगवान कृष्ण के जन्म को समर्पित है, जिन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।

जन्माष्टमी त्योहार हिंदू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास के आधे या कृष्ण पक्ष के आठवें दिन आयोजित किया जाता है। रोहिणी नक्षत्र इस अवधि के दौरान बढ़ता है। त्योहार अगस्त और सितंबर के बीच आता है।

त्योहार के पहले दिन से , लोग उपवास रखते हैं और रात में जागते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म को चिह्नित करने के लिए जन्माष्टमी मनाई जाती है। यह शुभ दिन था कि भगवान को उनके पिता द्वारा वृंदावन ले जाया गया था जहां उनकी देखभाल यशोदा ने की थी। मध्य रात्रि के समय, शिशु कृष्ण के देवता को पालना में पूजा जाता है। पालने को फूलों और पारंपरिक गहनों से खूबसूरती से सजाया जाता  है। पूजा समाप्त होने के बाद, पुजारी आरती करते हैं, अग्नि के साथ एक विशेष प्रार्थना करते हैं।

त्योहार के दिन, महिलाएं खुद को पारंपरिक साड़ियों में सजाती हैं और खुद को पारंपरिक गहनों से सजाती हैं। शिशु कृष्ण के रूप में प्रतीक के लिए बच्चों को कृष्णा  पैटर्न पर तैयार किए जाते हैं। यह शिशु भगवान कृष्ण के अपने पालक-घर में प्रवेश के लिए समर्पित है।

प्रारंभिक अनुष्ठान समाप्त होने के बाद, व्यापक उत्सव होते हैं। भक्त भगवान कृष्ण के मंदिरों में जाते हैं और पूजा करते हैं और सभी के बीच प्रसाद वितरित करते हैं। मिठाई और लड्डू भगवान कृष्ण को चढ़ाए जाते हैं और बाद में अन्य भक्तों और गरीब लोगों में बांट दिए जाते हैं। लोग परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और दोस्तों के बीच उपहार और अभिवादन का आदान-प्रदान करते हैं।

कृष्ण janmashtami विशेष रूप से वृंदावन, मथुरा, गोकुलधाम, वाराणसी एवं अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों में व्यापक रूप से इस महोत्सव को मनाया जाता है श्री कृष्ण भगवान 16 कलाओं में निपुण थे और सगुण ब्रह्म के प्रवर्तक थे गीता का उपदेश उन्होंने महाभारत में दिया था। श्री कृष्ण भगवान ने अर्जुन को गीता उपदेश के समय कहा था कि मैं ही ईश्वर हूँ, संपूर्ण ब्रह्मांड मुझ में ही व्याप्त है। अधर्म मार्ग से सन्मार्ग की ओर जाने के लिए प्रेरित किया था। आज ना केवल भारत में अपितु विश्व के अधिकांश देशों में श्री कृष्ण भगवान की पूजा आराधना वह जन्म उत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

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janmashtami

श्री कृष्ण भगवान विष्णु जी के 10 अवतारों में से एक अवतार थे। janmashtami

यह श्रीकृष्ण का ही प्रताप है कि आज सनातन धर्म की ओर सभी की दृष्टि केंद्रित है उन्हें यह एहसास है की यही एकमात्र धर्म है जो मोक्ष की ओर हमें ले जा सकता है।

कृष्ण भगवान के षोडशोपचार एवम् पुरुषसूक्त मन्त्रो के साथ पूजा की जाती है और अंत में श्री कृष्ण भगवान की आरती की जाती है।

भगवान श्रीकृष्णजी की आरती : janmashtami

आरती कुंजबिहारी की श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।

गले में बैजन्तीमाला बजावैं मुरलि मधुर बाला॥

श्रवण में कुंडल झलकाता नंद के आनंद नन्दलाला की। आरती…।

गगन सम अंगकान्ति काली राधिका चमक रही आली।

लतन में ठाढ़े बनमाली भ्रमर-सी अलक कस्तूरी तिलक।

चंद्र-सी झलक ललित छबि श्यामा प्यारी की। आरती…।

कनकमय मोर मुकुट बिलसैं देवता दरसन को तरसैं।

गगन से सुमन राशि बरसैं बजै मुरचंग मधुर मृदंग।

ग्वालिनी संग-अतुल रति गोपकुमारी की। आरती…।

जहां से प्रगट भई गंगा कलुष कलिहारिणी गंगा।

स्मरण से होत मोहभंगा बसी शिव शीश जटा के बीच।

हरै अघ-कीच चरण छवि श्री बनवारी की। आरती…।

चमकती उज्ज्वल तट रेनू बज रही बृंदावन बेनू।

चहुं दिशि गोपी ग्वालधेनु हंसत मृदुमन्द चांदनी चंद।

कटत भवफन्द टेर सुनु दीन भिखारी की। आरती…।

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