Karva Chauth की संपूर्ण जानकारी, पूजा विधि, नियम व महत्व,

Karva Chauth

सनातन धर्म की परंपरा में Karva Chauth त्यौहार का महत्वपूर्ण स्थान रहा है यह सौभाग्यवती अर्थात सुहागिनों का त्योहार माना जाता है। इस त्यौहार को संपूर्ण भारत के साथ विश्व में बसे भारतीयों द्वारा भी बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है इसमें स्त्रियां अपने पति के दीर्घायु के लिए व्रत करती हैं। भारतीय धारावाहिकों में इसके  महत्व को स्पष्ट रूप से  प्रदर्शित किया जा रहा है इसलिए वर्तमान समय में इसकी लोकप्रियता और भी बढ़ गई है। हम Karva Chauth के विषय में संपूर्ण जानकारी, पूजा विधि, नियम व महत्व के विषय में विस्तार से चर्चा करेंगे।

Karva Chauth की सामग्रियां (Karva Chauth Puja Thali)

1. छलनी

2. मिट्टी का टोंटीदार करवा और ढक्कन

3. करवा चौथ की थाली

4. दीपक

5. सिंदूर

6. फूल

7. मेवे

8. फल

9. रूई की बत्ती

10. कांस की तीलियां

11. करवा चौथ कैलेंडर

12. नमकीन मठ्ठियां

13. मीठी मठ्ठियां

14. मिठाई

15. रोली और अक्षत (साबुत चावल)

16. आटे का दीया

17. फूल

18. धूप या अगरबत्ती

19. चीनी का करवा

20. पानी का तांबा या स्टील का लोटा

21. गंगाजल

22. चंदन और कुमकुम

23. कच्चा दूध, दही रऔ देसी घी

24. शहद और चीनी

25. गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी

26. लकड़ी का आसन

27. आठ पूरियों की अठावरी और हलवा

28. दक्षिणा

29. नारियल

30. तुलसी के पत्ते

Karva Chauth के लिए सोलह श्रृंगार की सामग्रियां।

Karva Chauth

1. सिंदूर

2. मंगलसूत्र

3. बिंदी

4. मेहंदी

5. लाल रंग के कपड़े

6. चूड़ियां

7. बिछिया

8. काजल

9. नथनी

10. कर्णफूल (ईयररिंग्स)

11. पायल

12. मांग टीका

13. तगड़ी या कमरबंद

14. बाजूबंद

15. अंगूठी

16. गजरा

Karva Chauth व्रत के दिन किये जाने वाले नियम व पालन:-

करवा चौथ के दिन अनेक नियमों, बातों का ध्यान रखा जाना जरूरी होता है। व्रत के दिन प्रातः काल सूर्योदय के पहले उठकर नित्य क्रिया कर स्नान जरूर करें।

➡ व्रत के दिन आपस में बुराइयां या किसी की भी बुराइयां करने से बचना चाहिए।

➡काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि माया से दूर रहकर व्रत करना चाहिए।

➡करवा चौथ के दिन ब्रह्मचारी का पालन अनिवार्य होता है।

➡व्रत के दिन परिश्रम युक्त कार्यों को अन्य दिनों के लिए छोड़ देना चाहिए।

➡गर्भवती व महामारी (रजस्वला) स्त्रियों को व्रत नहीं करना चाहिए।

➡वे इसके स्थान पर संपूर्ण पूजन दूसरे व्रत धारी स्त्रियों से करवा सकती है

➡कामकाजी महिलाओं को तन मन से शुद्धता और पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए।

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Karva Chauth

Karva Chauth कब मनाया जाता है?

Karva Chauth भारतीय तिथि एवं पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी में मनाया जाता है। इसे नरक चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन ऐसे योग व नक्षत्र की स्थिति निर्मित होती है की Karva Chauth का पूजन करने वाली सौभाग्यवती होती हैं।

क्या कुंवारी लड़कियां भी Karva Chauth का उपवास रख सकती हैं?

अनेक कुंवारी लड़कियां अच्छे पति की कामना के लिए अनेक व्रतों को करती हैं Karva Chauth के व्रत को भी कुंवारी लड़कियां कर सकती हूं परंतु उनका कुछ विधान है उनका पालन करना चाहिए उन्हें चंद्रमा के दर्शन ना कर तारों का दर्शन करना चाहिए और अन्य पूजा विधि पूर्व की भांति ही रहेगी। आजकल यह अत्यंत लोकप्रिय होता जा रहा है कन्याएं टीवी धारावाहिकों के माध्यम से अपने प्रेमी के लिए भी व्रत रखने लगी हैं। इस विषय में इतना ही कहना उचित होगा की अगर आपका विवाह जब निश्चित हो गया है हो या होने वाला हो तभी उनके लिए Karva Chauth व्रत रखना चाहिए अन्यथा यह उचित नहीं कि प्रेमी के लिए उपवास रखा जाए।

Karva Chauth

Karva Chauth की संपूर्ण पूजन विधि एवं मंत्र:-

Karva Chauth व्रत में शंकर भगवान के साथ सपरिवार माता पार्वती कार्तिकेय एवं श्री गणेश भगवान जी का आवाहन एवं ध्यान पूजन किया जाता है।

शाम के समय जब चंद्रोदय होने का समय हो Karva Chauth की पूजन प्रारंभ कर देनी चाहिए सर्वप्रथम एक चौकी में बालू से निर्मित शंकर पार्वती का आवाहन करते हुए एक वेदी स्थापित करना चाहिए। प्रत्येक कार्य करते हुए मन में ओम नमः शिवाय मंत्र का उच्चारण करना चाहिए।

पूजन हेतु निम्न मंत्र बोलें –

ॐ शिवायै नमः’ से पार्वती का, ‘ॐ नमः शिवाय’ से शिव का, ‘ॐ षण्मुखाय नमः’ से स्वामी कार्तिकेय का, ‘ॐ गणेशाय नमः’ से गणेश का तथा ‘ॐ सोमाय नमः’ से चंद्रमा का पूजन करें।

विशेष : सभी देवी श्री पुरुष सूक्त व षोडशोपचार मंत्रों के द्वारा किया जाना चाहिए।  पूजन के पश्चात दीर्घायु मंत्र पढ़ें:-

पति की दीर्घायु की कामना  मंत्र : –

‘नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा।

प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।’

सभी देवी देवताओं का आवाहन करते हुए उनका पूजन करना चाहिए। गौरी गणेश का ध्यान करें। सर्वप्रथम  दीप प्रज्वलित कर स्वस्ति वाचन मंत्रों से प्रार्थना करना चाहिए। इसके बाद सभी नौ ग्रहों का ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरंतकारी मंत्रों से प्रार्थना करना चाहिए। इसके पश्चात कलश पूजन करें। सभी आवाहन करने के बाद संकल्प लेना चाहिए।

इसके बाद इसके पश्चात जल से वेदी को जल स्नान करावे। वस्त्र व जनेऊ के साथ आभूषण पहनाये। अबीर गुलाल सिंदूर टीका चंदन आदि सभी लगाना चाहिए। दुर्वा सभी भगवानों में अर्पित करें और ॐ नमः शिवाय का आवाहन भी मन में करना चाहिए। इसके पश्चात फूल अक्षत धूप दीप अगरबत्ती दिखाकर नावेद नए वेद भोग के रूप में सरगी जो समय से बनी होती है उसे अर्पित करें और जितने प्रकार के भोग के लिए प्रसाद उपलब्ध हो अर्पित करें इसके बाद फल चढ़ाना चाहिए नारियल चढ़ाना चाहिए पान सुपारी लोंग इलाइची भी अर्पित करें उसके पश्चात दक्षिणा के रूप में भगवान को अर्पित करें बाद में आरती के पश्चात क्षमा याचना कर लेना चाहिए।

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पूजन विधि

अंत में जब चंद्रमा उदय हो जाए –

तो चंद्रमा को अर्थ अर्घ्य देने के लिए जल से स्नान कराएं उनका पूजन करें। पूजन करने के पश्चात ध्यान करें। अपने स्थान पर खड़े हो जाएं और भगवान का आवाहन करें चलनी के माध्यम से चंद्रमा का दर्शन करें और अपने पति की ओर चलनी  ले जाकर उनका भी दर्शन करें और चरण स्पर्श करें इसके बाद सभी बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त कर एवं चरण स्पर्श करना चाहिए।

संपूर्ण पूजन के पश्चात गरीबों, महिलाओं एवं पुरोहितों को यथाशक्ति भोजन व दक्षिणा अवश्य देनी चाहिए यह अति पुण्य दायक होता है।

रात्रि के समय भगवान का आवाहन करते हुए पूजन करते हुए ध्यान करते हुए भजन गीत आदि का आचरण करता हुआ समय व्यतीत करना चाहिए इससे भगवान प्रसन्न हो जाते हैं और मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।

सुबह उठकर स्नान ध्यान के पश्चात करवा का विसर्जन एवं पूजन करना चाहिए।

Karva Chauth व्रत करने का महत्व क्या है:-

करवा चौथ व्रत वास्तव में पतिव्रता के लिए एक महत्वपूर्ण व्रत है जिसमें वह अपनी पति की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं शास्त्रों एवं पुराणों में इस व्रत का विशेष महत्व है।ऐसा माना जाता है कि करवा चौथ व्रत रखने से स्त्रियां सौभाग्यवती व सुहागिनी होने का सौभाग्य प्राप्त होता है और उनके पति दीर्घायु होते हैं। घर में सुख शांति प्रेम स्नेह मंगलमय समय का आगमन होता है। घर में संपूर्ण समृद्धि की प्राप्ति होती है। कुछ लोग इस दिन को हसबैंड डे के रूप में भी देखते हैं। महिलाओं द्वारा पतियों का सम्मान भी इस दिन विशेष रूप से किया जाता है यह भारतीय परंपराओं का एक प्रतिबिंब है हमें अपनी परंपराओं पर गर्व होना चाहिए और हम चाहे जितना आधुनिक हो जाएं इन त्योहारों व्रतों को हमें नहीं भूलना चाहिए।

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पूजन विधि

जल से ही व्रत तोड़ने का क्या कारण है?

व्रत करने वाली महिलाएं मिट्टी से बने करवे से पानी पीकर करवा चौथ का व्रत पूर्ण करती हैं। करवा पंच तत्वों का प्रतीकात्मक रूप है। करवा को बनाने में मिट्टी वह जल का प्रयोग किया जाता है यह दोनों का प्रतीक है इसे धूप में सुखाकर खुली हवा में रखा जाता है यह अंतरिक्ष वह वायु का प्रतीक माना जाता है बाद में आग में तपा कर इसे बनाया जाता है जो अग्नि का प्रतीक है अंत में इसमें जल डाला जाता है इस प्रकार पंचतत्व से निर्मित करवे के जल का ग्रहण कर सुहागिनी व्रत पूर्ण करती हैं। कुछ महिलाएं धातु में से निर्मित करवे का प्रयोग करती हैं जो उचित नहीं है करवे के जल का उपयोग करने से  स्वास्थ्य जल्दी ठीक हो जाता है।

क्या करें कि व्रत में प्यास कम लगे?

Karva Chauth का व्रत एक तप के समान होता है। इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। भूख प्यास लगना आम बात होती है। इनके प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय हैं, जिन्हें 1 दिन पहले किया जाना चाहिए।

1. नींबू का शरबत ले जिसमें तुलसी व मिश्री शामिल हो।

2. सोने से पूर्व भीगा हुआ सौंफ का सेवन करें।

3. मीठा दही का सेवन भी कर सकते हैं।

4. मौसम अनुसार रस युक्त फलों का सेवन किया जा सकता है।

5. एक घंटे तक किसमिस को भीगा कर उसका सेवन करने से व्रत के दिन प्यास कम लगती है।

विशेष सूचना:- Karva Chauth एवं अन्य व्रतों से संबंधित कोई प्रश्न कोई भ्रांतियां उत्पन्न हो या कोई अन्य सलाह लेना हो तो आप हमारे ज्योतिषाचार्य पंडित अभिनव पांडेय जी से 7999314964 पर संपर्क सीधा कर सकते हैं। हमारे पंडित जी आपको निशुल्क सन्मार्ग व उत्तर प्रदान करेंगे।

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