vijayadashami – दशहरा का इतिहास, पूजन महत्व एवम् अनसुने तथ्य

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vijayadashami पर्व भारत का राष्ट्रीय पर्व है इस पर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। देश-विदेश से पर्यटक यहां रावण दहन को देखने आते हैं। विजयादशमी के समय हम सभी अपने घरों में परम्परानुसार रावण दहन करते हैं। अधिकतर लोग रावण के पुतले को घरों में बनाते हैं। उसमें बड़े-बड़े फटाके लगाते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर रावण के पुतले की पूजा करते हैं। और फिर हमे आग लगाने के लिए कहते हैं।

हम कितना आनंदित होते हैं! आज के दिन अधिकतर सार्वजनिक स्थानों के मेले एवम् बड़े रावण दहन भी देखने जाते हैं। रावण दहन के पश्चात सभी बंधुओं के घर मिलने जाते हैं। कई क्षेत्रों में रावण दहन के बाद सोनपत्र भी देते हैं।सब कुछ कितना ख़ुशी देता है। कभी मन में ख्याल भी आता है कि ये सब क्यों मानते हैं? आज हम मन में आने वाली इन सभी बातों के पीछे के कारणों की खोज करेंगे तो आइये जाने vijayadashami के बारे में-

दशहरा शौर्य का, शक्ति का, स्वास्थ्य का पर्व है।

इस दिन हम अपनी भौतिक शक्ति, मुख्यतः शस्त्र और स्वास्थ्य बल का लेखा-जोखा करते हैं। अपनी शक्तियों को विकसित एवं सामर्थ्य उक्त बनाने के लिए दशहरा पर्व प्रेरणा देता है। वैसे इस पर्व के साथ अनेकों का था कथाएं जुड़ी हुई हैं; लेकिन मुख्यतः दुर्गा माँ, जो शक्ति की अधिष्ठात्री देवी है, इसका इतिहास अधिक महत्व रखता है। कथा है कि ब्रह्मा जी ने असुरों का सामना करने के लिए सभी देवताओं को कि थोड़ी-थोड़ी शक्ति संग्रहित करके माँ दुर्गा अर्थात संघ शक्ति का निर्माण किया और उस के बल पर शुंभ-निशुंभ, मधु-कैटभ, महिषासुर आदि बलवान राक्षसों का अंत हुआ।

समाज को हानि पहुंचाने वाली आसुरी शक्तियों का सामूहिक और दुष्ट व्यक्तियों का प्रतिरोध करने के लिए हमें संगठन शक्ति के साथ-साथ उक्त शक्तियों का अर्जन भी करना चाहिए। उक्त 8 शक्तियों से संपन्न समाज ही दुष्टताओं का अंत कर सकता है। समाज द्रोही को भी नष्ट कर सकता है। दुराचारी षड्यंत्र कार्यों का मुकाबला कर सकता है।

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vijayadashami पर्व का क्या महत्व है?

विजयादशमी पर्व भारत के प्रमुख राष्ट्रीय पर्वों में से एक है। यह पर्व सनातन काल से मनाया जाता रहा है इस पर्व का मुख्य उद्देश्य सच्चाई की विजय के प्रतीक के रूप में जनमानस तक पहुंचाना है। यह पर्व  सुख शांति, पाप का नाश करने वाला, काम क्रोध मोह से बचाने वाला, साहस शौर्य देने वाला, खुद पर विजय प्राप्त करने वाला पर्व है। प्राचीन काल में अनेक राजाओं द्वारा युद्ध की शुरुआत इसी दिन किया करते थे। रावण दहन इस पर्व की मुख्य पहचान है यह बुराइयों का प्रतीक है जिसका अंत निश्चित ही होता है । इस पर्व में ही संदेश छिपा हुआ। वैसे यह वर्ष में तीन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में से एक मुहूर्त है शस्त्र पूजा इस पर्व की एक और खासियत है। आज यह पर्व ना केवल भारत अपितु संपूर्ण विश्व में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है।

इस पर्व का नाम दशहरा एवम् vijayadashami नाम कैसे पड़ा?

विजयादशमी नाम के पीछे ऐतिहासिक एवम् पौराणिक मान्यताएँ हैं एक समय एक दैत्य महिषासुर कठिन तपस्या किया और वरदान प्राप्त कर अत्यंत अत्याचार करने लगा। जिसके कारण मां दुर्गा को अवतार लेना पड़ा और 10 दिनों तक भीषण युद्ध हुआ दशमी के दिन महिषासुर का वध हुआ इस दिन असत्य पर सत्य की विजय का दिन घोषित हुआ इसलिए इस पर्व का नाम विजयादशमी नाम पड़ा। इसका नाम दशहरा पर्व भी है जिसका अर्थ भी होता है दशमी तिथि। यह श्री राम जी द्वारा रावण पर विजय के प्रतीक के रूप में दशहरा नाम दिया गया इसलिए इस पर को दशहरा पर्व भी कहा जाता है।

vijayadashami पर्व हर वर्ष कब मनाया जाता है?

विजयदशमी पर्व प्रति वर्ष अश्विन माह के शुक्लपक्ष के दशमी के दिन यह पर्व सम्पूर्ण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है।

vijayadashami पूजन की तैयारी कैसी होनी चाहिए?

यह पर्व आश्विन नवरात्र  से जुड़ा रहता है। नवरात्रि साधना का एक महत्वपूर्ण एवं सामूहिक साधना कर्म का भी महत्वपूर्ण पर्व होता है। नौ दिन का सामूहिक साधना का अनुष्ठान जहां जिस स्तर पर भी हो, आयोजित करना चाहिए।  नवमी को बहुधा पूर्णाहुति के लिए सभी साधक एकत्र होते हैं। दशहरे के दिन प्रातः काल पूर्णाहुति रखकर नवरात्रि साधना की पूर्णाहुति एवं दशहरा पर्व का संयुक्त रूप भी दिया जा सकता है उनमें राम री साधना पूर्णाहुति नवमी को दशहरे से 1 दिन पूर्व कर ली गई, तो स्थानीय सुविधा के अनुसार दशहरा पर्व पूजन दशमी के दिन प्रातः काल या सांयकाल काल कभी भी किया जा सकता है।

देवपूजन मंच पर अष्टभुजी मां दुर्गा का चित्र स्थापित किया जाना चाहिए। शस्त्र पूजन के लिए कोई शस्त्र चौकी पर सजा कर रखना चाहिए। पूजन सामग्री के साथ पुष्प अक्षत चंदन आदि उपस्थिति के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में रखना चाहिए।

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The Ravana, Kumbhakarna and Meghanada effigies before flaming, at the Dussehra celebrations, at Red Fort Ground on the auspicious occasion of Vijay Dashmi, in Delhi on October 17, 2010.

vijayadashami पर्व पूजन क्रम:-

विजयदशमी पर्व के अनुरूप प्रेरणा उभारने के लिए उपयुक्त संगीत एवं संक्षिप्त भूमिका के बाद पूजन क्रम प्रारंभ किया जाता है। षट् कर्म से रक्षा विधान तक सामान्य क्रम यथास्थिति चलाएं। विशेष पूजन नीचे लिखे अनुसार करें।

दुर्गा आवाहन पूजन –

दुर्गा देवी व्रतियों का नाम है भावना करें कि यह देवा अनुकूल विशेषताएं हममें, जन-जन में जागे। उनका सदुपयोग करने की क्षमता मेरे। इस भावना के साथ सभी हाथ जोड़कर यह मंत्र बोलें।

ॐ सङ्गच्छ ध्वम् संव-दध्वम् सं वो मनांसि जनताम्।

देवाभागम् यथापूर्वे, सज्जा-नाना उपासते।।

इसके बाद मां दुर्गा जी का विशेष आवाहन करें-

माँ दुर्गा आवाहन

ॐ गिरियाजै विद्महे, शिवप्रियायै धीमहि।

तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्।।

ॐ नमस्ते शरण्ये शिवे सनुकम्पे, नमस्ते जगद् व्यापिके विश्वरूपे।

नमस्ते जगद्-वन्द्य पादारविन्दे, नमस्ते जगत्तारिणी त्राहि दुर्गे।।

ॐ श्री दुर्गायै नमः। आवाहयामि, स्थापयामि, ध्यायामि।

🔯तत्पश्चात पुरुष सूक्त  मंत्रों के साथ षोडशोपचार पूजन करें।🔯

शस्त्र पूजा कैसे करें?

आसुरी शक्तियों को नियंत्रित करने के लिए जिन साधनों की आवश्यकता पड़ती है, उन्हें शस्त्र कहते हैं। उनका उपयोग रक्षार्थ करना ही पड़ता है; परंतु एक बार शस्त्र के प्रयोग का अभ्यास होते ही उसका उपयोग स्वार्थ पूर्ति के लिए भी किया जाने लगता है। शस्त्र पूजा के साथ यह प्रेरणा जुड़ी है कि शस्त्र का ऐसा उपयोग हो; जो अभिनंदनीय हो। शास्त्रों में मां दुर्गा वह संस्कार पैदा करें जो उनको सद् उद्देश्य से भटकने ना दे। चौकी पर शस्त्र रखकर मंत्र सहित उस पर पुष्प चढ़ा में विशेष शस्त्र ना हो तो लाठी, चाकू, आदि से काम चला लेना चाहिए।

ॐ शत्रु षाण्नीषाड-भिमातिषाहो गवेषणः सहमान उद्-भित्।

वाग्वीव मन्त्रं प्र भरस्व वाचं, सांग्राम-जित्यायेषमुद्वदेह।।

इसके बाद यज्ञ आहुति के लिए यज्ञ कुंड तैयार कर लिए जाएं और यथास्थिति के साथ हवन एवं पूजन किया जाना चाहिए।

पूजा के अंत में संकल्प करें-

क्षमा प्रार्थना मंत्र

पापोऽहं पापकर्माहं पापात्मा पापसम्भवः ।

त्राहि माम्‌ परमेशानि सर्वपापहरा भव ॥

अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया ।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि ॥

!! इति श्री विजयादशमी पर्व पूजनम् संपूर्णम्!!

vijayadashami के लिए प्रसिद्ध प्रमुख स्थान:-

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विजयादशमी पर्व भारत के प्रत्येक क्षेत्र में मनाया जाता है इसमे प्रमुख रूप से प्रसिद्ध स्थान निम्न हैं।

हिमाचल प्रदेश का कुल्लू दशहरा सर्वाधिक प्रसिद्ध है यहां इसके पीछे 500 साल पहले घटित एक ऐतिहासिक घटना के कारण यहाँ का दशहरा प्रसिद्ध हुआ।हिमाचल के कुल्लू में दशहरा 8 दिनों तक चलता है। यहां देश-विदेश से हजारो लोग इसे देखने आते हैं। यह पर्व कुल्लू के लोगों के लिए मेल मिलाप है,

बस्तर का दशहरा विश्व प्रसिद्ध है यह दशहरा 75 दिनों तक चलता है जो विश्व में सर्वाधिक है यहां रावण दहन नहीं होता है; परंतु इसकी एक लंबी पूजन पद्धति होती है। जिसमें रथ यात्रा की जाती है यह रथयात्रा आदिवासी जनजातियों के द्वारा की जाती है। यह रथयात्रा पर्व दंतेश्वरी  देवी की पूजा अर्चना के लिए विशेष रुप से मनाया जाता है।

आखिर विजयदशमी/दशहरा पर्व क्यों मनाया जाता है?

दशहरा का पर्व शक्तियों का अर्जन करने तथा शक्ति की उपासना करने का पर्व है। स्मरण रहे संसार में कमजोर, अशक्त व्यक्ति ही पाप-बुराई-अन्याय को प्रोत्साहन देते हैं। जहां इस तरह की व्यक्ति अधिक होंगे वह समाज अस्त-व्यस्त एवं नष्ट भ्रष्ट हो जाएगा। वहां अशांति अन्याय का बोलबाला होगा ही।

दशहरे पर भगवान राम द्वारा रावण पर विजय की कथा भी सर्वविदित है। व्यक्ति के अंदर परिवार एवं समाज में असुर प्रतियों की वृद्धि ही अनर्थ का कारण है।

vijayadashami के दिन विजया नक्षत्र में देवी की योगिनी जया और विजया आश्विन शुक्ल दशमी तिथि को होती है। ये योगनियां अपारजित हैं इन्हें कोई पराजित नहीं कर सकता।

ऐसा कहा जाता है कि पांडवों एवं कौरवों के बीच युद्ध भीषण युद्ध हुआ।इस युद्ध में विजय पांडवों के पक्ष में विजयादशमी के दिन ही प्राप्त हुई।

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रावण की पूजा भारत में कहां कहां की जाती है?

vijayadashami के दिन संपूर्ण भारत में रावण दहन किया जाता है परंतु कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां रावण की पूजा की जाती है जुलूस निकाला जाता है रावण का मंदिर भी है। कुछ प्रमुख जगह की बात की जाए तो-

1.बैजनाथ कस्बा, हिमाचल प्रदेश

2.लंकेश्वर महोत्सव, कोलार, कर्नाटक।

3.दशानन मन्दिर कानपुर, उत्तर प्रदेश

4. विदिशा, मध्य प्रदेश

5.मन्दसौर, मध्यप्रदेश

आदि जगहों पर रावण दहन प्रतिबंधित है। इसके पीछे कई ऐतिहासिक कारण हैं।

सभी व्रतों एवम् त्योहारों से संबंधित कोई प्रश्न, कई भ्रांतियां उत्पन्न हो या कोई अन्य सलाह लेना हो तो आप हमारे ज्योतिषाचार्य पंडित अभिनव पांडेय जी से 7999314964 पर संपर्क कर सकते हैं। वे उचित सन्मार्ग प्रदान करेंगे।

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